बाबाजी कौन हैं?
येसà¥à¤®à¤¸à¥€à¤¹ सदृश संत à¤à¤µà¤‚ अमर, अकà¥à¤·à¤¯ योगी महावतार बाबाजी के सशरीर उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ का परिचय सनॠ1946 में पà¥à¤°à¤•ाशित अपनी चिरà¥à¤ªà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• योगी कथामृत के माधà¥à¤¯à¤® से परमहंस योगाननà¥à¤¦ ने किया | आधà¥à¤¨à¤¿à¤• à¤à¤¾à¤°à¤¤ के महानतम योगियों में से à¤à¤•, योगानंद ने बताया कि किस पà¥à¤°à¤•ार हिमालय में वास करते हà¥à¤ बाबाजी ने सदियों से आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• विà¤à¥‚तियों का मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ किया है | बाबाजी à¤à¤• महान सिदà¥à¤§ हैं जो साधारण मनà¥à¤·à¥à¤¯ कि सीमाओं को तोड़ कर समसà¥à¤¤ मानव मातà¥à¤° के आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• विकास के लिये चà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤ª काम कर रहे हैं | बाबाजी आतà¥à¤®à¤ªà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° से दूर नेपथà¥à¤¯ में रह कर योग साधकों को इस तरह सहायता करते हैं कि कई बार साधकों को उनके बारे में मालूम तक नहीं रहता | परमहंस योगाननà¥à¤¦ ने ये à¤à¥€ बतलाया है कि सनॠ1861 में लाहिड़ी महाशय को कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ योग के नाम से पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ अति पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¶à¤¾à¤²à¥€ तकनीकों की शिकà¥à¤·à¤¾ देने वाले बाबाजी ही हैं | बाद में लाहिड़ी महाशय ने अनेक साधकों को कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ योग की दीकà¥à¤·à¤¾ दी | लगà¤à¤— 30 वरà¥à¤· बाद उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने योगानंद के येसà¥à¤®à¤¸à¥€à¤¹ सदृश गà¥à¤°à¥ शà¥à¤°à¥€ यà¥à¤•à¥à¤¤à¥‡à¤¶à¥à¤µà¤° गिरी को दीकà¥à¤·à¤¾ दी | योगानंद ने 10 वरà¥à¤· अपने गà¥à¤°à¥ के सानà¥à¤¨à¤¿à¤§à¥à¤¯ में बिताठजिसके बाद सà¥à¤µà¤¯à¤‚ बाबाजी ने उनके सामने पà¥à¤°à¤•ट होकर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ योग के इस दिवà¥à¤¯ जà¥à¤žà¤¾à¤¨ को पाशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥à¤¯ देशों में ले जाने का निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶ दिया | 1920 से लेकर अपने जीवन के अंत तक योगानंद इस मिशन को सफल बनाने में जà¥à¤Ÿà¥‡ रहे | सनॠ1952 में शरीर तà¥à¤¯à¤¾à¤— कर महासमाधी में लीन होने के बाद à¤à¥€ योगानंद ने कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ योग के पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ à¤à¤µà¤‚ इस परमà¥à¤ªà¤°à¤¾ को अपनी शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤‚जलि दी | उनके शरीर तà¥à¤¯à¤¾à¤— के 21 दिन बाद à¤à¥€ उनके शरीर में कोई विकृति नहीं आई | 21 दिनों के बाद उनके शरीर को काà¤à¤¸à¥‡ के ताबूत में रख कर लोस अनà¥à¤œà¥‡à¤²à¥‡à¤¸ में संरकà¥à¤·à¤¿à¤¤ किया गया | मारà¥à¤š 2002 में उनके महासमाधी के पचासवीं वारà¥à¤·à¤¿à¤•ी पर उनके पारà¥à¤¥à¤¿à¤µ अवशेष को सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ समाधी-सà¥à¤¥à¤² में पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित किया गया | इस अवसर पर पूरी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में लाखों लोगों ने योगानंद के धरोहर को कृतजà¥à¤žà¤¤à¤¾à¤ªà¥‚रà¥à¤µà¤• याद किया |
कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ बाबाजी पà¥à¤°à¤•ट हà¥à¤
दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¾à¤°à¤¤ में कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ योग की शिकà¥à¤·à¤¾ के पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° के लिये बाबाजी सनॠ1942 से ही दो आतà¥à¤®à¤¾à¤“ं को तैयार कर रहे थे | इनमे से à¤à¤• थे मदà¥à¤°à¤¾à¤¸ विशà¥à¤µ विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में à¤à¥‚गरà¥à¤ विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ के यà¥à¤µà¤¾ सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤• छातà¥à¤° शà¥à¤°à¥€ à¤à¤¸. à¤. à¤. रमैयà¥à¤¯à¤¾ और दूसरे थे पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ पतà¥à¤°à¤•ार शà¥à¤°à¥€ वी. टी. नीलकानà¥à¤¤à¤¨ जो जिदà¥à¤¦à¥‚ कृषà¥à¤£à¤®à¥‚रà¥à¤¤à¤¿ की संरकà¥à¤·à¤¿à¤•ा à¤à¤µà¤‚ थेओसोफिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया की संसà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤•ा à¤à¤¨à¥à¤¨à¥€ बेसेंट के शिषà¥à¤¯ थे | बाबाजी अलग अलग समय पर इन दोनों के सामने पà¥à¤°à¤•ट हà¥à¤ और फिर उन लोगों को अपने मिशन पर काम करने के लिये इकठà¥à¤ ा किया | सनॠ1952 और 1953 में बाबाजी ने अपनी तीन पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ें “द वोइस ऑफ बाबाजी à¤à¤‚ड मिसà¥à¤Ÿà¥€à¤¸à¤¿à¤¸à¥à¤® अनलॉकà¥à¤¡", “बाबाजीज़ मासà¥à¤Ÿà¤°à¤•ी टू ऑल इलà¥à¤¸" और “बाबाजीज़ डेथ ऑफ डेथ" वी. टी. नीलकानà¥à¤¤à¤¨ से लिखवाईं | बाबाजी ने इन दोनों को अपने जीवन चरितà¥à¤°, अपनी परमà¥à¤ªà¤°à¤¾ और कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ योग से अवगत कराया | बाबाजी के अनà¥à¤°à¥‹à¤§ पर 17 अकà¥à¤Ÿà¥‚बर 1952 को इन दोनों ने “कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ बाबाजी संघ†नामक à¤à¤• नई संसà¥à¤¥à¤¾ की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ की | यह संसà¥à¤¥à¤¾ बाबाजी के कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ योग के शिकà¥à¤·à¤£ à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤° को समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ है | नीलकानà¥à¤¤à¤¨ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ लिखी गई पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ों के पà¥à¤°à¤•ाशन à¤à¤µà¤‚ वितरण से पूरे à¤à¤¾à¤°à¤¤ में à¤à¤• नई जागरूकता फैल गई | à¤à¤¸.आर.à¤à¤« (सेलà¥à¤« रिअलाईजेशन फेलोशिप) ने इन पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ों को à¤à¤µà¤‚ “कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ बाबाजी संघ†को दबाने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किया | नीलकानà¥à¤¤à¤¨ के मितà¥à¤° तथा à¤à¤¾à¤°à¤¤ के ततà¥à¤•ालीन पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨ मंतà¥à¤°à¥€ पंडित नेहरॠबीच-बचाव कर à¤à¤¸.आर.à¤à¤« के इस पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ को विफल किया | बाबाजीज़ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ योगा ऑफ आचारà¥à¤¯à¤¾à¤œà¤¼ ने सनॠ2003 में “द वोइस ऑफ बाबाजी†के नाम से इन तीनों पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ों का संकलित रूप पà¥à¤¨à¤ƒ पà¥à¤°à¤•ाशित किया |
“मासà¥à¤Ÿà¤°à¤•ी टू ऑल इलà¥à¤¸â€ में बाबाजी ने “मैं कौन हूठ?†का सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ उतà¥à¤¤à¤° दिया है | संकà¥à¤·à¥‡à¤ª में उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बताया कि जब हम सà¥à¤µà¤¯à¤‚ अपनी वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤•ता को जान लेंगे तब हम यह à¤à¥€ जान लेंगे कि बाबाजी कौन हैं | तातà¥à¤ªà¤°à¥à¤¯ यह है कि बाबाजी की पहचान न तो उनकी सीमित मानवीय वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ या उनके जीवन के घटनाकà¥à¤°à¤® से और न ही उनकी देव रूप में परिणित शरीर से à¤à¥€ की जा सकती है | हम सà¤à¥€ के लिये आतà¥à¤®-साकà¥à¤·à¤¾à¤¤à¥à¤•ार पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ के लिये मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ देने की खातिर उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने पहली बार अपने जीवन के कà¥à¤› अनमोल वृतà¥à¤¤à¤¾à¤¨à¥à¤¤ का विवरण दिया है | बाबाजी की जीवन की इन घटनाओं को बाद में “बाबाजी व 18 महरà¥à¤·à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ योग परमà¥à¤ªà¤°à¤¾â€ में पà¥à¤°à¤•ाशित किया गया है |
अपने अंदर निहित दिवà¥à¤¯ चेतना à¤à¤µà¤‚ महान शकà¥à¤¤à¤¿ कà¥à¤£à¥à¤¡à¤²à¤¿à¤¨à¥€ के पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• सरà¥à¤ªà¤¿à¤¨à¥€ पर सà¥à¤µà¤¾à¤®à¤¿à¤¤à¥à¤µ पा लेने के कारण बाबाजी को “नागराज†नाम दिया गया | उनका जनà¥à¤® कावेरी नदी और हिंद सागर के संगम पर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ तमिल नाडू के à¤à¤• तटीय गà¥à¤°à¤¾à¤® परंगिपेटà¥à¤Ÿà¤ˆ में 30 नवमà¥à¤¬à¤° सनॠ203 में हà¥à¤† | à¤à¤—वान कृषà¥à¤£ के तरह उनका जनà¥à¤® रोहिणी नकà¥à¤·à¤¤à¥à¤° में हà¥à¤† | उनका जनà¥à¤® कारà¥à¤¤à¤¿à¤• मास की अमावसà¥à¤¯à¤¾ को हà¥à¤† जब कारà¥à¤¤à¤¿à¤•ेय दीपम अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ दीपावली का तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° मनाया जा रहा था | उनके माता-पिता मूलतः दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¾à¤°à¤¤ के पशà¥à¤šà¤¿à¤®à¥€ तट मालाबार निवासी नमà¥à¤¬à¥‚दरी बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¤£ थे | उनके पिता गाà¤à¤µ के शिव मंदिर के पà¥à¤œà¤¾à¤°à¥€ थे जहाठआज शिव के पà¥à¤¤à¥à¤° मà¥à¤°à¥à¤—न आसीन हैं |
5 वरà¥à¤· की उमà¥à¤° में बाबाजी को à¤à¤• वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¾à¤°à¥€ ने अगवा कर लिया और दास बना कर कलकतà¥à¤¤à¤¾ ले गया | वहाठà¤à¤• अमीर सेठने वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¾à¤°à¥€ को उनका दाम देकर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ दिलवाई | वह यायावर साधà¥à¤“ं की à¤à¤• छोटी जमात में शामिल हो गठ| उनके साथ रह कर उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¤¾à¤°à¤¤ की धारà¥à¤®à¤¿à¤• और आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• गà¥à¤°à¤‚थों का अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ किया लेकिन वह इतने से संतà¥à¤·à¥à¤Ÿ नहीं हो पाठ| जब उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने सà¥à¤¨à¤¾ कि महान सिदà¥à¤§ अगसà¥à¤¤à¥à¤¯ सशरीर उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ हैं तब वह तीरà¥à¤¥ यातà¥à¤°à¤¾ पर निकल परे | à¤à¤¾à¤°à¤¤ के दकà¥à¤·à¤¿à¤£ में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ शà¥à¤°à¥€ लंका दà¥à¤µà¥€à¤ª के दकà¥à¤·à¤¿à¤£à¥€ छोड़ पर कटीरगाम के पवितà¥à¤° मंदिर पहà¥à¤‚चे | वहाठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अगसà¥à¤¤à¥à¤¯ के à¤à¤• शिषà¥à¤¯ बोगनाथ मिले | चार वरà¥à¤· तक उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बोगनाथ से धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ का गहन अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ और सिदà¥à¤§ योगियों के दरà¥à¤¶à¤¨, सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚तम की शिकà¥à¤·à¤¾ ली | वहीं उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने “सरà¥à¤µà¤¿à¤•लà¥à¤ª समाधी†की अवसà¥à¤¥à¤¾ में कटीरगाम मंदिर के अधिषà¥à¤ ाता à¤à¤—वान मà¥à¤°à¥‚गन का दरà¥à¤¶à¤¨ पाया |
जब वे 15 वरà¥à¤· के हà¥à¤ तब बोगनाथ ने बाबाजी को अपने गà¥à¤°à¥ पौराणिक अगसà¥à¤¤à¥à¤¯ मà¥à¤¨à¤¿ के पास à¤à¥‡à¤œà¤¾ जो तमिल नाडू में कोतà¥à¤°à¤²à¥à¤²à¤® के निकट वास कर रहे थे | वहाठउनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने 48 दिनों तक घोर तपसà¥à¤¯à¤¾ की | तब अगसà¥à¤¤à¥à¤¯ मà¥à¤¨à¤¿ ने उनके सामने पà¥à¤°à¤•ट होकर पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¶à¤¾à¤²à¥€ सà¥à¤µà¤¶à¤¨ तकनीक, कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ कà¥à¤£à¥à¤¡à¤²à¤¿à¤¨à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤® की दीकà¥à¤·à¤¾ दी | उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बालक नागराज को जो कà¥à¤› उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सिखाया गया था उनका गहन अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ कर सिदà¥à¤§ बनने के लिये हिमालय की ऊà¤à¤šà¤¾à¤ˆ पर बसा बदà¥à¤°à¥€à¤¨à¤¾à¤¥ जाने की आजà¥à¤žà¤¾ दी | वहाठजाकर नागराज ने अगले 18 महीनों तक à¤à¤• गà¥à¤«à¤¾ में रह कर बोगनाथ और अगसà¥à¤¤à¥à¤¯ के सिखाठगठतकनीक का अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ किया | à¤à¤¸à¤¾ करते हà¥à¤ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने अहं का परितà¥à¤¯à¤¾à¤— किया और अपने रोम रोम में बà¥à¤°à¤¹à¥à¤® को अवतरित कर लिया | अपनी चेतना और अपनी शकà¥à¤¤à¤¿ बà¥à¤°à¤¹à¥à¤® को समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ कर वह सिदà¥à¤§ बन गठ| उनका शरीर आधि-वà¥à¤¯à¤¾à¤§à¤¿ के पà¥à¤°à¤•ोप से और यहाठतक कि मृतà¥à¤¯à¥ से à¤à¥€ मà¥à¤•à¥à¤¤ हो गया | तब à¤à¤• महरà¥à¤·à¤¿ के रूप में परिणत इस महान सिदà¥à¤§ ने अपने आप को संतपà¥à¤¤ मानवता के कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ के लिये समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ कर दिया |
बाबाजी का अकà¥à¤·à¤¯ जीवन
उसके बाद सैकड़ों बरसों से बाबाजी ने इतिहास के महानतम संतों à¤à¤µà¤‚ अनेकानेक आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• गà¥à¤°à¥à¤“ं को पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ दी है और कारà¥à¤¯- सिदà¥à¤§à¤¿ के लिये उनका मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ किया है| ईशà¥à¤µà¥€ संवत के नौवीं शताबà¥à¤¦à¥€ में हिनà¥à¤¦à¥‚ धरà¥à¤®à¤‚ के महान पà¥à¤¨à¤°à¥à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤• आदि शंकराचारà¥à¤¯ और 15 वीं शताबà¥à¤¦à¥€ में हिनà¥à¤¦à¥‚ और मà¥à¤¸à¤²à¤®à¤¾à¤¨ दोनो ही के चहेते संत कबीर à¤à¥€ इनमे शामिल थे | कहा जाता है कि बाबाजी ने सà¥à¤µà¤¯à¤‚ पà¥à¤°à¤•ट होकर दीकà¥à¤·à¤¾ दी थी और इन दोनों ने अपने लेखन में बाबाजी का उलà¥à¤²à¥‡à¤– किया है | उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने 16 वरà¥à¤· की अवसà¥à¤¥à¤¾ के à¤à¤• मोहक किशोर का शरीर धारण कर रखा है | 19 वीं शताबà¥à¤¦à¥€ में थिओसोफिकल सोसाइटी की संसà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤•ा मैडम बलावतà¥à¤¸à¤•ी ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बà¥à¤¦à¥à¤§ के अवतार मैतà¥à¤°à¥‡à¤¯ और आने वाले काल के विशà¥à¤µ गà¥à¤°à¥ के रूप में पहचाना | इनà¥à¤¹à¥€ विशà¥à¤µ गà¥à¤°à¥ का उलà¥à¤²à¥‡à¤– सी. डबà¥à¤²à¥à¤¯à¥‚. लेडबेटर ने अपनी पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• “मासà¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ à¤à¤‚ड द पाथ†में किया है |
वैसे तो बाबाजी अपà¥à¤°à¤•ट और गà¥à¤ªà¥à¤¤ रहना पसंद करते हैं लेकिन कà¤à¥€-कà¤à¥€ अपने à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ और शिषà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को दरà¥à¤¶à¤¨ देते हैं |उनको शिकà¥à¤·à¤¾ देने और उनकी उनà¥à¤¨à¤¤à¤¿ करवाने के लिये बाबाजी समय समय पर उनके मन में तरह तरह के आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§ बनाते जाते हैं | हममे से हरेक के साथ उनका समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§ अनूठा है और हमारी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त आवशà¥à¤¯à¤•ताओं और हमारे सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µ के अनà¥à¤°à¥‚प है | वह हमारे अंतरंग गà¥à¤°à¥ हैं | और जैसे जैसे हमारी चेतना का विसà¥à¤¤à¤¾à¤° होता है बाबाजी के सानà¥à¤¨à¤¿à¤§à¥à¤¯ में हम विशà¥à¤µ वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥€ पà¥à¤°à¥‡à¤® à¤à¤µà¤‚ करà¥à¤£à¤¾ का दरà¥à¤¶à¤¨ पाकर हर जगह और हर चीज में बाबाजी को देखते हैं |
बाबाजी के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ योग का पà¥à¤¨à¤°à¥à¤¤à¥à¤¥à¤¾à¤¨
बाबाजी ने महरà¥à¤·à¤¿ पतंजलि दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ तीसरी शताबà¥à¤¦à¥€ में पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ “योग सूतà¥à¤°â€ में वरà¥à¤£à¤¿à¤¤ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ योग का पà¥à¤¨à¤°à¥à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤° किया | सूतà¥à¤° II.1 में कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ योग की परिà¤à¤¾à¤·à¤¾ इस पà¥à¤°à¤•ार दी गयी है : “सतत अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸(वैरागà¥à¤¯ के साथ), सà¥à¤µà¤¾à¤§à¥à¤¯à¤¾à¤¯ à¤à¤µà¤‚ ईशà¥à¤µà¤° पà¥à¤°à¤£à¤¿à¤§à¤¾à¤¨â€ | पतंजलि के बताये हà¥à¤ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ योग के साथ बाबाजी ने तंतà¥à¤° साधना की शिकà¥à¤·à¤¾ को à¤à¥€ जोड़ा | इनमे पà¥à¤°à¤®à¥à¤– हैं पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤®, मंतà¥à¤° à¤à¤µà¤‚ à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ दिवà¥à¤¯ चेतना à¤à¤µà¤‚ महान शकà¥à¤¤à¤¿ “कà¥à¤£à¥à¤¡à¤²à¤¿à¤¨à¥€â€ को विकसित करना | कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ योग के उनके आधà¥à¤¨à¤¿à¤• संशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ में अनेक बहà¥à¤®à¥‚लà¥à¤¯ तकनीक जोड़े गठहैं | बाबाजी ने सनॠ1861 में लाहिड़ी महाशय को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¶à¤¾à¤²à¥€ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ योग विदà¥à¤¯à¤¾ की दीकà¥à¤·à¤¾ दी |
बाबाजी के बताये हà¥à¤ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ योग के अनà¥à¤¯ तकनीक
सनॠ1954 में बदà¥à¤°à¥€à¤¨à¤¾à¤¥ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ अपने आशà¥à¤°à¤® में 6 महीने की अवधि में बाबाजी ने अपने à¤à¤• महान à¤à¤•à¥à¤¤ à¤à¤¸. à¤. à¤. रमैयà¥à¤¯à¤¾ को समूरà¥à¤£ 144 कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ की दीकà¥à¤·à¤¾ दी जिसमे आसन, पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤®, धà¥à¤¯à¤¾à¤¨, मंतà¥à¤° à¤à¤µà¤‚ à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ के वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤°à¤¿à¤• तकनीक समà¥à¤®à¤¿à¤²à¤¿à¤¤ हैं | पूरी तरह योगी के रूप में निषà¥à¤£à¤¾à¤¤ होकर उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने “बाबाजीज़ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ योगा†नाम से अपने मिशन की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ कर सारी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में हजारों जिजà¥à¤žà¤¾à¤¸à¥à¤“ं को इस विदà¥à¤¯à¤¾ से जोड़ा |
आतà¥à¤®-पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° के बिना परोकà¥à¤· रूप से ही काम करना बाबाजी अपने उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ के लिये उपयà¥à¤•à¥à¤¤ पाते हैं | किनà¥à¤¤à¥ जो अतà¥à¤¯à¤¨à¥à¤¤ à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤²à¥€ होते हैं उनको बाबाजी पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤•à¥à¤· दरà¥à¤¶à¤¨ à¤à¥€ देते हैं | सनॠ1970 में हिमालय के कà¥à¤®à¤¾à¤Šà¤ पहाड़ीयों के ऊपर सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ सतà¥à¤¯à¤¸à¥à¤µà¤°à¤¾à¤¨à¤‚द को दरà¥à¤¶à¤¨ दे कर बाबाजी ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ लाहिड़ी महाशय के लेखन का अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ और पà¥à¤°à¤•ाशन करने का à¤à¤¾à¤° सौंपा | यह कारà¥à¤¯ सतà¥à¤¯à¤¸à¥à¤µà¤°à¤¾à¤¨à¤‚द ने सेन डिà¤à¤—ो, कैलिफोरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ से पà¥à¤°à¤•ाशित धारावाहिक “संसà¥à¤•ृत कà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤¿à¤•à¥à¤¸â€ में किया | सनॠ1999 में पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ पंकà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के लेखक मारà¥à¤¶à¤² गोविनà¥à¤¦à¤¨ को बाबाजी के जीवंत आà¤à¤¾à¤°à¥‚प का दरà¥à¤¶à¤¨ हà¥à¤† | बदà¥à¤°à¥€à¤¨à¤¾à¤¥ से लगà¤à¤— 30 किलोमीटर दूर, समà¥à¤¦à¥à¤°à¤¤à¤² से 5000 मीटर की ऊà¤à¤šà¤¾à¤ˆ पर अलकनंदा नदी के उदà¥à¤—म पर बाबाजी अपने तमà¥à¤¬à¤ˆ केशराशि और सफ़ेद धोती में à¤à¤• दैदीपà¥à¤¤à¤¾à¤®à¤¾à¤¨ यà¥à¤µà¤• के रूप में आये और मारà¥à¤¶à¤² गोविनà¥à¤¦à¤¨ को उनके चरण सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ करने का सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤† |
बाबाजी की उपलबà¥à¤§à¤¿à¤¯à¤¾à¤
बाबाजी की सचà¥à¤šà¥€ पहचान पाने के लिये या उनकी गरिमा की à¤à¤• à¤à¤²à¤• पाने के लिये उस सिदà¥à¤§ परमà¥à¤ªà¤°à¤¾ को जानना आवशà¥à¤¯à¤• है जिसमे बाबाजी अवतरित हà¥à¤ हैं | सिदà¥à¤§ ऋषियों ने सà¥à¤µà¤°à¥à¤— जैसे किसी परलोक में पालायन करने की जगह बà¥à¤°à¤¹à¥à¤® का साकà¥à¤·à¤¾à¤¤à¥à¤•ार अपने आप में किया और अपने असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ के पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• कोष को बà¥à¤°à¤¹à¥à¤® की अà¤à¤¿à¤µà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ का à¤à¤• माधà¥à¤¯à¤® बना डाला | अपने मानव सà¥à¤µà¤°à¥à¤ª का सरà¥à¤µà¤¾à¤‚गीन कायाकलà¥à¤ª करना ही उनका लकà¥à¤·à¥à¤¯ है |
ईशà¥à¤µà¥€ संवत के दूसरे से चौथे शताबà¥à¤¦à¥€ के दौरान सिदà¥à¤§ तिरà¥à¤®à¥‚लर के
गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ “तिरà¥à¤®à¤‚दिरम†में संकलित 3000 दोहों में सिदà¥à¤§ ऋषियों की सिदà¥à¤§à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का सटीक à¤à¤µà¤‚ सà¥à¤¸à¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ विवरण है | हमारी शोध से यह जाना गया है कि योग के सà¥à¤ªà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ पà¥à¤°à¤£à¥‡à¤¤à¤¾, पतंजलि
और बाबाजी के गà¥à¤°à¥ बोगनाथ उनके गà¥à¤°à¥à¤à¤¾à¤ˆ थे | वैसे तो सिदà¥à¤§ परमà¥à¤ªà¤°à¤¾ के साहितà¥à¤¯ का उनकी मूल à¤à¤¾à¤·à¤¾ संसà¥à¤•ृत या तमिल से अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ में अनà¥à¤µà¤¾à¤¦ कम ही हà¥à¤† है फिर à¤à¥€ कà¥à¤› वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾ अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ में उपलबà¥à¤§ है |
इनमे पà¥à¤°à¤®à¥à¤– हैं डा.कामिल जà¥à¤µà¥‡à¤²à¤¿à¤¬à¤¿à¤² की “पोà¤à¤Ÿà¥à¤¸ ऑफ द पॉवरà¥à¤¸â€ और पà¥à¤°à¥‹.डेविड गोरà¥à¤¡à¤¨ वाइट की “द अलà¥à¤•ेमिकल बॉडी†| इन दोनों ही पà¥à¤°à¤¬à¥à¤¦à¥à¤§ गà¥à¤°à¤‚थों में सिदà¥à¤§ ऋषिओं की अदà¥à¤à¥à¤¤ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾à¤“ं को उजागर किया
गया है जिनसे यह सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ हो जाता है कि बाबाजी किसी और लोक से आये हà¥à¤ कोई मायावी नहीं थे | मनà¥à¤·à¥à¤¯ के कà¥à¤°à¤®à¤¿à¤• विकास की अगली कड़ी में ऋषि अरबिंदो ने जिस परामानसिक अवसà¥à¤¥à¤¾ की कामना और
à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯à¤µà¤¾à¤£à¥€ समसà¥à¤¤ मानवता के लिये की थी मानव चेतना का वही सà¥à¤µà¤°à¥à¤ª बाबाजी में पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित हà¥à¤† | और अपने इस रूप में वो हमारे मसीहा या कोई धरà¥à¤® पà¥à¤°à¤µà¤°à¥à¤¤à¤• नहीं हैं | उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ यश-कीरà¥à¤¤à¤¿ या शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾-à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ की
कोई चाह नहीं है | अनà¥à¤¯ सिदà¥à¤§ महरà¥à¤·à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की तरह ही उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने आप को पूरी तरह अवà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ बà¥à¤°à¤¹à¥à¤® को समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ कर दिया है और अब वह विशà¥à¤µ वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ अंधकार को अपनी चैतनà¥à¤¯ जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿, अबाध आनंद और
पूरà¥à¤£ शांति पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ कर रहे हैं | मनà¥à¤·à¥à¤¯ जीवन में पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¯ चेतना की यह सरà¥à¤µà¥‹à¤šà¥à¤š उपलबà¥à¤§à¤¿ सà¤à¥€ को $हो |
इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€ देखें :
कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ योग का परिचय
कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ योग पर लेख
बाबाजी के कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ योग में दीकà¥à¤·à¤¾
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